Palak ki kheti – पालक की खेती कैसे करें?

Palak ki kheti :- नमस्कार किसान भाइयो, पालक की खेती करने में आज इस पोस्ट के माध्यम से आपको पालक की खेती(Palak ki kheti) करने में काफी सहायता होगी और आप पालक की खेती में अच्छी उपज भी ले सकते है। तो आओ शुरू करें पालक की खेती(Palak ki kheti) के बारे में जानकारी :-

Palak ki kheti
Palak ki kheti

Palak ki kheti

Palak ki kheti :- पालक भी पत्तेदार सब्जियों में एक महत्वपूर्ण सब्जी है, जिसकी खेती पूरे भारत में की जाती है। पालक आयरन से भरपूर, मिनरल से भरपूर और विटामिन से भरपूर फसल है। पालक का प्रयोग हरी सब्जी के रूप में किया जाता है।

दैनिक जीवन के लिए संतुलित आहार के रूप में प्रतिदिन 100-125 ग्राम पालक खाने की सलाह दी जाती है। शरीर के हीमोग्लोबिन यानी रक्त के प्रति जागरूक लोगों के लिए पालक से बेहतर कोई सब्जी नहीं है।

यह एक ऐसी फसल है, जो कम समय और कम लागत में अच्छा मुनाफा देती है। पालक को एक बार बोने के बाद 5-6 बार काट लिया जाता है। पालक की फसल साल भर ली जाती है। इसके लिए अलग-अलग महीनों में इसकी बुवाई करनी पड़ती है।

पालक की व्यावसायिक खेती से किसान अच्छा लाभ कमा सकता है। इसके लिए उसे आधुनिक तकनीक से खेती करनी होगी।

जलवायु या तापमान

पालक की सफल खेती(Palak ki kheti) के लिए ठंडी जलवायु की आवश्यकता होती है। पालक के पत्ते सर्दियों में अधिक बढ़ते हैं, जबकि तापमान अधिक होने पर इसकी वृद्धि रुक ​​जाती है, इसलिए मुख्य रूप से सर्दियों में पालक की खेती करना अधिक फायदेमंद होता है। लेकिन पालक की खेती साल भर मध्यम जलवायु में की जा सकती है।

भूमि चयन

पालक की सफल खेती(Palak ki kheti) के लिए उचित जल निकासी वाली चिकनी दोमट भूमि अधिक उपयुक्त होती है। पालक की अच्छी वृद्धि के लिए यह भी ध्यान रखना चाहिए कि भूमि का पीएच मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए।

भूमि की तैयारी के लिए जमीन की जुताई के बाद जब वह खेती योग्य हो जाए तो एक जुताई कर देनी चाहिए। मिट्टी पलटने वाले हल से उसके बाद 2 या 3 बार हैरो या कल्टीवेटर चलाकर मिट्टी को बारीक कर लेना चाहिए। साथ ही पाटा चलाकर जमीन को समतल कर लें।

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उन्नत किस्में

पालक की खेती(Palak ki kheti) से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए विशेष क्षेत्र की जलवायु और भूमि के अनुसार किस्मों का चयन करना भी एक आवश्यक कदम है। इसके साथ ही पालक की सफल खेती के लिए चयनित किस्मों की विशेषताओं का भी ध्यान रखना चाहिए।

पालक की खेती के लिए किसान निम्नलिखित किस्मों में से किसी एक को चुनकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं – ऑलग्रीन, पूसा ज्योति, पूसा हरित, पालक नंबर 51-16, वर्जीनिया सेवॉय, अर्ली स्मूद लीफ आदि।

बीज मात्रा

पालक की खेती(Palak ki kheti) के लिए खेत में पर्याप्त मात्रा में बीज की आवश्यकता होती है। अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए सही और उन्नत बीज का चयन करना चाहिए, जो विश्वसनीय दुकान से प्राप्त किया जाना चाहिए। अच्छा यह एक है। बीज में 25 से 30 किलो बीज पर्याप्त होता है।

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बुवाई का समय

पालक की बुवाई करते समय पर्यावरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पालक को उपयुक्त वातावरण में वर्ष भर बोया जा सकता है। पालक की फसल(Palak ki kheti) से अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए जनवरी-फरवरी, जून-जुलाई और सितंबर-अक्टूबर में बुवाई की जा सकती है, जिससे पालक की अच्छी पैदावार होती है।

बुवाई विधि

आमतौर पर पालक को छिड़काव विधि से बोया जाता है। लेकिन पालक की खेती(Palak ki kheti) से अधिक उपज प्राप्त करने के लिए इसे पंक्तियों में बोना चाहिए।

पालक की पंक्ति में बिजाई के लिए पंक्तियों और पौधों के बीच की दूरी क्रमशः 20 से 25 सेमी और 20 सेमी रखी जानी चाहिए। पालक के बीजों को 2 से 3 सेमी की गहराई में बोना चाहिए और इससे अधिक गहराई में नहीं बोना चाहिए।

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खाद और उर्वरक

खेत में खाद और उर्वरकों का प्रयोग करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि खेत की तैयारी के समय गोबर को समान रूप से फैलाकर मिट्टी पलटने वाले हल से जोताई कर मिट्टी में मिला दें।

इसके बाद स्फुर और पोटाश की पूरी मात्रा और नत्रजन की 20 किलो मात्रा भी मिट्टी में समान रूप से फैलाकर खेत की अंतिम जुताई के समय मिट्टी में मिला देना चाहिए।

यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि उर्वरकों के छिड़काव के बाद दूसरे दिन खेत की सिंचाई करनी चाहिए, ताकि पोषक तत्व पौधों की जड़ों द्वारा आसानी से अवशोषित हो जाएं, ताकि फसल दूसरी कटाई के लिए तैयार हो सके।

सिंचाई

पालक की फसल(Palak ki kheti) से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए खेत में सिंचाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पालक एक पत्तेदार सब्जी होने के कारण इसकी वृद्धि के लिए बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती है। पालक के बीजों में अच्छे अंकुरण के लिए बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करना बहुत फायदेमंद होता है।

पालक की फसल(Palak ki kheti) की उचित वृद्धि के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी की आवश्यकता होती है। इसलिए खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए 7-8 दिनों के अंतराल पर सिंचाई की व्यवस्था करें।

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फसल की कटाई

जब पत्तियों की लंबाई 15 से 30 सेमी. संबंधित होना। पालक के पत्तों की कटाई तभी करनी चाहिए जब वह नर्म और रसीले हों। इस प्रकार पालक की एक ही फसल से लगभग 5-6 कटाई की जा सकती है। पालक को कटाई के तुरंत बाद बाजार में भेजना सुनिश्चित करें।

उपज

Palak ki kheti :- पालक की प्रति हेक्टेयर 80 से 90 क्विंटल हरी पत्तियाँ प्राप्त होती हैं।

पालक की बुवाई कब करें?

जून-जुलाई-अगस्त

पालक कितने दिन में तैयार होती है?

60-80 दिनों में

पालक की बुवाई कौन से महीने में की जाती है?

जनवरी-फरवरी, जून-जुलाई

अंतिम शब्द

किसान भाइयो आपको इस आर्टिकल में हमने पालक की खेती(Palak ki kheti) के बारे में आपको जानकारी प्रदान की है जिसके कारन आप पालक की खेती को आधुनिक तरीके से कर सकते है। अगर आपको पालक की खेती(Palak ki kheti) के बारे में दी गयी जानकारी पसंद आयी तो कमेंट करें और अपने दोस्तों को भी शेयर करें।

धन्यवाद, आपका दिन शुभ हो।

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