गाय पालन (Gaay palan) की शुरुआत कैसे करे ?

Gaay palan :-नमस्कार दोस्तों, गाय पालन कैसे करें? या फिर गाय पालन का काम कैसे करें? आज आपको इस पोस्ट में हम गाय पालन की बात करेंगे और आपको इसके बारे में विस्तार से बताएंगे। तो इस पोस्ट को पूरा पढ़े और गाय पालन(Gaay palan) के बारे में जानकारी प्राप्त करे।

Gaay palan
Gaay palan

Gaay palan

आप जो भी जगह चुनें, सुनिश्चित करें कि वह साफ है क्योंकि गायें गंदी जगहों पर बीमार पड़ सकती हैं। परिवहन की कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। आपके पास परिवहन की अच्छी सुविधा होनी चाहिए ताकि आप अपने माल को बाजार तक पहुंचा सकें। वह स्थान जल स्रोत के पास होना चाहिए। वैसे तो पूरे विश्व में गाय का बहुत महत्व है,

लेकिन भारत के संदर्भ में यह प्राचीन काल से ही भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। बात चाहे दूध की हो या खेती में इस्तेमाल होने वाले बैलों की। वैदिक काल में गायों की संख्या व्यक्ति की समृद्धि का मानक हुआ करती थी। दुधारू पशु होने के कारण यह बहुत ही उपयोगी घरेलू पशु है। गाय पालन, दुग्ध उत्पादन व्यवसाय या डेयरी फार्मिंग छोटे और बड़े दोनों स्तरों पर सबसे व्यापक रूप से फैला हुआ व्यवसाय है। गाय पालन व्यवसाय, वाणिज्यिक या छोटे पैमाने पर दूध उत्पादन किसानों को कुल दूध उत्पादन में मदद करता है और उनके आर्थिक विकास को बढ़ाता है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत में डेयरी किसानों ने कई वर्षों तक Gaay palan कर दूध उत्पादन से लेकर आर्थिक विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। Gaay palan से दुग्ध उत्पादन ने हमारे देश की अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा योगदान दिया है और कई गरीब किसानों को गाय पालन करके अपना व्यवसाय स्थापित करने में मदद की है। यदि किसी के पास दुग्ध उत्पादन व्यवसाय स्थापित करने के लिए प्रारंभिक पूंजी हो तो दुग्ध उत्पादन व्यवसाय किसी भी क्षेत्र में आसानी से स्थापित किया जा सकता है।

गाय पालन कैसे करें ?

चलो दोस्तों अब आपको बताते है की गाय पालन कैसे करें? और आपको Gaay palan की पूरी जानकारी निचे दी गयी है। जिसे पढ़कर आप गाय पालन( Gaay palan ) का व्यवसाय कर सकते है और अच्छी आमदनी भी प्राप्त कर सकते है। तो आइये शुरू करें गाय पालन के बारे में।

गाय के आश्रय की जगह

जब भी आप Gaay palan व्यवसाय के बारे में सोच रहे हों तो सबसे पहले आपको गाय रखने के लिए जगह की आवश्यकता होगी। गाय को रखने के लिए ऐसी जगह का चुनाव करना चाहिए जो बाजार से ज्यादा दूर न हो और उस जगह पर परिवहन की सुविधा भी अच्छी हो। भले ही आप 2-3 गायों के साथ व्यवसाय शुरू कर रहे हों, लेकिन जगह इतनी बड़ी चुनें कि आप भविष्य में वहां और गायें रख सकें।

  • उस स्थान पर गाय के रहने के लिए केवल एक छोटा सा घर ही बनाएं जो ऊपर से छायादार हो, जो चारों ओर से हवादार हो।
  • जमीन चिकनी और हल्की ढलान वाली होनी चाहिए ताकि जब गाय पेशाब करे तो वह जमने के कारण आसानी से बहे।
  • गाय के गोबर को चिकनी जमीन पर उठाना भी आसान है।

गाय पालन की नस्ल के नाम

नस्ल: जानवरों के समूह जो दिखने में समान होते हैं और अपने जैसे बच्चे पैदा कर सकते हैं, नस्ल कहलाते हैं। दूसरे शब्दों में, समान रंग, रूप और बनावट वाली एक ही प्रकार की प्रजाति को नस्ल कहा जाता है। गाय की नस्लों की बात करें तो हमारे देश में दो तरह की नस्लों का पालन किया जाता है।

देशी नस्ल

विदेशी नस्ल।

आइये जानते हैं दुधारू गाय की नस्लों के बारे में। 

गिर

गिर गाय का मूल गुजरात है। यह भारत की सबसे बड़ी दुग्ध उत्पादक नस्लों में से एक है। इस गाय के थन बड़े होते हैं। यह गाय लाल रंग की होती है। इनके कान लंबे और लटके हुए होते हैं। यह एक दुग्धपान में लगभग 2200-2600 लीटर दूध देती है। भारत के अलावा विदेशों में भी इस गाय की मांग है। इन गायों को इजरायल, ब्राजील में भी पाला जाता है।

रेड सिंधी

देशी नस्लों में लाल सिंधी गाय तीसरे स्थान पर है। इन गायों की दुग्ध उत्पादन क्षमता एक बार में लगभग 1800-2200 होती है। यह गाय भी लाल रंग की होती है। इस नस्ल का मूल स्थान सिंध प्रांत है, लेकिन अब यह गाय पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और ओडिशा में भी पाई जाती है।

हरियाणवी

इस नस्ल की गाय सफेद रंग की होती है। वे दूध उत्पादन में भी सुधार करते हैं। यह नस्ल एक दुग्धपान में लगभग 2200-2600 लीटर दूध देती है। इस नस्ल के बैल कृषि में अच्छा करते हैं, इसलिए हरियाणवी नस्ल की गायों को दूध और कृषि दोनों में पाला जाता है।

साहीवाल

साहीवाल देशी और दुधारू नस्लों में सबसे अच्छी नस्ल है। यह मुख्य रूप से उत्तर पश्चिमी भारत और पाकिस्तान में पाया जाता है। यह नस्ल लाल रंग की होती है। इनका शरीर लम्बा, ढीला और भारी होता है। इनके सिर चौड़े और सींग मोटे और छोटे होते हैं। यह एक स्तनपान में लगभग 2400-3000 लीटर दूध देती है। एक बार यह गाय मां बन जाती है तो करीब 10 महीने तक दूध देती है। साहीवाल गाय के दूध में वसा की मात्रा 4.0-4.5 प्रतिशत और एसएनएफ की मात्रा 8.0-8.5 प्रतिशत होती है। यही कारण है कि पशुपालक इसे सबसे ज्यादा पसंद करते हैं।

गाय पालन में भोजन

वैज्ञानिक रूप से दुधारू पशुओं के शरीर के वजन के अनुसार भोजन के विभिन्न तत्वों जैसे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, खनिज, विटामिन और पानी की आवश्यकता होती है जैसे जीवित रहने, वृद्धि और उत्पादन आदि। 24 घंटे में पशु को खिलाएं। वह भोजन (अनाज और चारा) जिसमें खाद्य तत्व अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उपस्थित होते हैं, पशु आहार कहलाता है। जिस आहार में पशु के सभी आवश्यक पोषक तत्व उचित अनुपात और मात्रा में उपलब्ध होते हैं, उसे संतुलित आहार कहते हैं।

पशु में चारा की मात्रा उसकी उत्पादकता और प्रजनन अवस्था पर निर्भर करती है। पशु को कुल आहार का 2/3 भाग मोटे चारे के साथ और 1/3 भाग अनाज के मिश्रण से खिलाना चाहिए। मोटे चारे में दलहन और गैर दलहनी चारे का मिश्रण दिया जा सकता है। आहार में दालों की मात्रा बढ़ाकर अनाज की मात्रा को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

यद्यपि पशु के आहार की मात्रा उसके शरीर की आवश्यकता और कार्य के अनुसार तथा उपलब्ध खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले पोषक तत्वों के आधार पर गणना करके निर्धारित की जाती है।

यह भी पढ़े :-पशु पालन (Pashu Palan) क्या होता हैं ? कैसे करें

गाय पालन (Gaay palan) देखभाल रोग नियंत्रण

  • संक्रामक रोगों से बचने के लिए नियमित टिके लगवाएं.
  • बाह्य परिजीवियों पर नियंत्रण रखे| संकर पशुओं में तो यह अत्यंत आवश्यक है.
  • आन्तरिक परजीवियों पर नियंत्रण रखने के लिए हर मौसम परिवर्तन पर आन्तरिक परजिविनाशक दवाएँ दें.
  • संकर गौ पशु, यदि चारा कम खा रहा है या उसने कम दूध दिया तो उस पर ध्यान देवें| संकर गाय देशी गाय की आदतों के विपरीत बीमारी में भी चारा खाती तथा जुगाली भी करती है.
  • थनैला रोग पर नियंत्रण रखने के लिए पशु कोठा साफ और हवादार होना चाहिए. उसमें कीचड़, गंदगी न हो तथा बदबू नहीं आना चाहिए| पशु के बैठने का स्थान समतल होना चाहिए तथा वहाँ गड्ढे, पत्थर आदि नुकीले पदार्थ नहीं होना चाहिए| थनैला रोग की चिकित्सा में लापरवाही नहीं बरतें.

गाय पालन (Gaay palan) में गाय का दाम

गाय का दाम जोड़ने का सबसे अच्छा तरीका उसकी दूध उत्पादन छमता पर निर्भर करता है.

अगर 1 गाय एक दिन में 1 लीटर दूध देती है तो उसका दाम Rs 3,500 से ले कर 4,500 तक होगा.

कीमत = Rs 35,000 to 45,000

प्रतिदिन ढूध प्रति गाय = 10 Litre

कुल उत्पादन का मूल्य = Rs 52,000 to 68,000

प्रतिदिन ढूध प्रति गाय = 20 Litre

मूल्य = Rs 70,000 to 90,000

अंतिम शब्द

दोस्तों, आपको इस पोस्ट में हमने गाय पनाल( Gaay palan ) के बारे में बताया है की Gaay palan कैसे करें? अगर यह जानकरी अच्छी लगी तो अपने दोस्तों को भी शेयर करें ताकि उनको भी पता चले।

धन्यवाद, आपका दिन शुभ हो।

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