फुटबॉल में कितने खिलाड़ी होते हैं – (football has players)

football has players :- नमस्कार दोस्तों आप सभी का guidensa.com में स्वागत है आज हम बात करने वाले हैं कि फुटबॉल में कितने खिलाड़ी या प्लेयर होते हैं ? फुटबॉल खेलने के तरीके क्या है ? भारतीय फुटबॉल का इतिहास क्या है ? पूरी जानकारी दी जाएगी।
फुटबॉल विश्व का सबसे लोकप्रिय खेल है और लगभग यह सभी देशों में खेला जाता है। हर किसी का कोई न कोई पसंदीदा खेल जरूर होता है किसी का क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन, वॉलीबॉल इसके अलावा और भी। लेकिन आज हम बात करेंगे दुनिया के सबसे पुराने खेल फुटबॉल के बारे में।

फुटबॉल की टीम में कितने खिलाड़ी होते हैं ?

फुटबॉल टीम में खिलाड़ियों की बात की जाए तो एक फुटबॉल की टीम में 11 खिलाड़ी होते हैं। इस तरह दोनों टीम में मिलाकर 22 खिलाड़ी होते हैं। गोलकीपर भी इसके अंदर आता है। और जो मुख्य पोजीशन होता है फुटबॉल के खेल में पहला गोलकीपर, दूसरी डिफेंसर, तीसरी आउटसाइड fullback, चौथी सेंट्रल डिफेंडर, पांचवी मिडफील्डर्स, छठवीं फॉरवर्ड्स और अंतिम सेंट्रल फॉरवर्ड इसके अलावा भी बहुत सारी पोजीशन होती है लेकिन मुख्य यही पोजीशन होती है।

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सब्सीट्यूट कितने मिलते हैं एक फुटबॉल टीम को ?

फीफा के अंदर जितने भी फुटबॉल मैच होते हैं उसमें तीन सब्सीट्यूट दिए जाते हैं। यदि किसी खिलाड़ी को चोट लग जाती है या कुछ प्रॉब्लम आ जाता है तो सब्सीट्यूट लिया जाता है।

भारतीय फुटबॉल खिलाड़ियों के नाम

भारत के 10 प्रमुख फुटबॉल खिलाड़ियों के नाम निम्नलिखित है।

  • सुनील छेत्री
  • सुब्रता पॉल
  • जेजे लालपेखलुआ
  • फ्रांसिस फर्नांडिस
  • अर्नब मंडल
  • करणजीत सिंह
  • नारायण दास
  • प्रीतम कोटल
  • रॉलिन बॉर्गेस
  • संदेश झिंगन

फुटबॉल कैसे खेलते हैं ? फुटबॉल खेलने के तरीके देखे

  • फुटबॉल खेलने के लिए सबसे पहले 2 टीम की जरूरत होती है । इस खेल का असली मकसद फुटबॉल को सामने वाली टीम के नेट में डालकर दूसरी टीम से ज्यादा पॉइंट हासिल करना होता है।
  • ऑफिशियल रूल के अनुसार हर एक टीम में 11 खिलाड़ी होते हैं और खेल 90 मिनट तक चलता है शुरू करने के लिए सारे खिलाड़ी को अलग-अलग पोजीशन दिया जाता है।
  • गोलकीपर का काम दूसरा टीम द्वारा हिट की गई बाल को अपनी टीम के नेट में जाने से रोकना होता है। और फील्ड में स्थित सभी खिलाड़ियों में केवल गोलकीपर ही फुटबॉल को अपने हाथों से पकड़ सकता है।
  • डिफेंडर का काम सामने वाली टीम को अपने कॉल पर शॉट मारने से रोककर गोलकीपर को सपोर्ट करना और इसके अलावा सामने वाली टीम के खिलाड़ी से फुटबॉल को छीनकर अपने टीम के खिलाड़ी को बाल पास करना होता है।
  • मिडफील्डर का काम फुटबॉल को डिफेंस करते हुए अपने स्ट्राइकर्स तक ले जाना होता है। उसके बाद स्ट्राइकर्स फुटबॉल को अपने विरोधी टीम के नेट में मारता है।

फुटबॉल का इतिहास

तो हम जान लेते हैं फुटबॉल नाम की उत्पत्ति कैसे हुई इसका इतिहास क्या है? फुटबॉल नाम की उत्पत्ति के बारे में लोगों की अलग-अलग राय है फुटबॉल एक चीनी खेल सुजू का विकसित रूप है। चीन में इस तरह का खेल खेला जाता था। उसी से यह खेल विकसित हुआ है। यह खेल चीन में हान वंश के दौरान विकसित हुआ था। और जापान में आसुका वंश के शासन काल में भी फुटबॉल खेला जाता था। 15 वी शताब्दी में फुटबॉल अपने ही नाम फुटबॉल नाम से खेला गया। सन् 1586 में जॉन डेविड नाम के समुद्री जहाज के कप्तान व कार्यकर्ता ने फुटबॉल खेला था।
सन् 1408 में ब्रिटेन के राजकुमार हेनरी चतुर्थ ने फुटबॉल शब्द का इस्तेमाल अंग्रेजी में किया था। सन् 1526 में इंग्लैंड के राजा हेनरी ने फुटबॉल खेलने में रुचि दिखाई थी और एक विशेष प्रकार का जूता भी बनवाया था।

भारतीय फुटबॉल का इतिहास देखे |

भारत में फुटबॉल की शुरुआत बंगाल से हुआ था भारत में 19वीं शताब्दी के बीच में क्रिकेट के साथ-साथ फुटबॉल भी ब्रिटिश ही यहां लाए थे। इसे यहां ब्रिटिश सैनिकों के मनोरंजन के लिए शुरू किया गया था लेकिन फुटबॉल को देश में लोकप्रिय किया नागेंद्र प्रसाद सर्वाधिकारी ने। इन्हें फादर ऑफ इंडियन फुटबॉल भी कहा जाता है। 1951 से 1962 का समय भारतीय फुटबॉल के लिए गोल्डन समान माना जाता है। सैयद अब्दुल रहीम की कोचिंग में भारत की टीम एशिया में बेस्ट बन गई थी। 1956 – 1958 के ओलंपिक में भारत की टीम चौथे नंबर पर रही थी।

फुटबॉल का वजन कितना होता है ?

फुटबॉल का वजन 340 से 370 ग्राम होता है।
इस ब्लॉग पोस्ट में आपको फुटबॉल में कितने खिलाडी व् इतिहास बताया गया है

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